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सिंधु घाटी सभ्यता | INDUS VALLEY CIVILIZATION | HINDI

सिंधु घाटी सभ्यता 

सिंधु घाटी सभ्यता | INDUS VALLEY CIVILIZATION | HINDIसिंधु घाटी सभ्यता ( INDUS VALLEY CIVILIZATION ) :- विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता थी | यह हड़प्पा सभ्यता और सिंधु - सरस्वती सभ्यताओं के नाम से भी जानी जाती है | आज से लगभग 80 वर्ष पूर्व पाकिस्तान के ' पश्चिम पंजाब प्रान्त ' के मांटगोमरी जिले ' में स्थित हरियाणा के निवासीयो को सायद इस बात का  किंचितमात्र भी आभास नही था की वे अपने आस पास की जमीन में दबी जिन ईटों का प्रयोग धड़ल्ले से अपने मकानों के निर्माण में कर रहे है , वह कोई साधारण ईंट नहीं , बल्कि लगभग 5,000 वर्ष पुरानी और पूरी तरह विकसित सभ्यता के अवसेस है | इसका आभास उन्हें तब हुआ जब 1856 ई. में ' जॉन विलियम ब्रन्टम ' ने कराची से  लाहौर तक रेलवे लाइन बिछवाने हेतु ईटों के आपूर्ति के इन खंडहरों की खुदाई प्रारम्भ करवायी | खुदाई के दौरान ही इस सभ्यता के प्रथम अवशेष प्राप्त हुए , जिसे इस सभ्यता का नाम ' हड़प्पा सभ्यता ' का नाम दिया गया | 

खोज :- इस अज्ञात सभ्यता की खोज का श्रेय " रायबहादूर दयाराम साहनी " को जाता है | उन्होंने ही पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक " सर जॉन मार्शल " के निर्देशन में 1921 में इस स्थान की खुदाई करवायी | लगभग एक वर्ष बाद 1922 में भी " श्री राखल दास बनर्जी " के नेतृत्व में पाकिस्तान के सिंध प्रान्त के " लरकाना " जिले के मोहनजोदड़ो में स्थित एक बौद्ध स्तूप की खुदाई के समय एक और स्थान का पता चला | इस नवनीतम स्थान के  प्रकाश में आने के उपरांत यह मान लिया गया कि संभवतः यह सभ्यता सिंधु नदी की घाटी तक ही सिमित है , अतः इस सभ्यता का नाम " सिंधु घाटी की सभ्यता ' ( INDUS VALLEY CIVILIZATION ) रखा गया | सबसे पहले 1927 में हड़प्पा एवं ' हड़प्पा सभ्यता ' पड़ा | पर कालांतर में ' पिग्गट ' ने हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो को एक विस्तृत साम्राज्य की जुड़वाँ राजधानियां  बतलाया | 

विवरण : - सबसे पहले 1927  में "हड़प्पा"  नामक स्थल पर उत्खनन होने के कारण सिंधु सभ्यता का नाम "हड़प्पा सभ्यता " पड़ा |  पर कालांतर में  " पिग्गट " ने हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो को एक विस्तृत                         सामाजिक  की जुड़वा राजधानिया बतलाया | 

खोज का श्रेय : - इस अज्ञात सभ्यता की खोज का श्रेय ' रायबहादुर दयाराम साहनी ' को जाता है |उन्होंने ही      पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक ' सर जॉन मार्शल ' के निर्देशन में 1921 में इस स्थान की खुदाई करवायी| 

काल :-1920 ईसा पूर्व के दशक में सर्वप्रथम हड़प्पाई सभ्यता का ज्ञान हुआ | 

दुर्ग :- नगर की पश्चिमी टीले पर संभवतः सुरक्षा हेतु एक दुर्ग का निर्माण हुआ था जिसकी उत्तर से  दक्षिण की ओर लम्बाई 460  गज एवं पूर्व से पश्चिम  की ओर लम्बाई 215 गज थी | 

कला :- सैंधव सभ्यता की कला में मुहरों का अपना विशिस्ट स्थान था | अब तक करीब 2000 मुहरें प्राप्त की जा चुकी हैं | इसमें लगभग 1200 अकेले मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुई हैं | 

धर्म :- हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो में असंख्य देवियों की मुर्तिया प्राप्त हुई हैं |  विद्वानों का अनुमान है कि ये मूर्तियाँ मातृदेवी अथवा प्रकृति देवी  की हैं | प्राचीन काल से ही मातृ या प्रकृति की पूजा भारतीय करते रहे हैं और आधुनिक काल में भी कर रहे हैं |

सिंधु सभ्यता स्थल :- हड़प्पा , मोहनजोदड़ो चन्हूदड़ों , लोथल , रोपड़ , कालीबंगा , सूरकोटदा , आलमगीरपुर (मेरठ) बड़ावली ( हरियाणा ), धौलावीरा , अलीमुराद ( सिंध प्रांत ) आदि |  

क्या सिंधु घाटी के शहर थे महाभारत काल में प्राचीन सिंधु देश के हिस्से ?

आर्यभट के अनुसार महाभारत काल का युद्ध 3137 ईसा पूर्व में हुआ था | लगभग इसी काल में सिंधुघाटी की सभ्यता अपने चरम पर थी | पहले की खुदाई और शोध के आधार पर मन जाता था की 2600 ईसा पूर्व हड़प्पा और मोहनजोदड़ो नगर सभ्यता की स्थापना हुई थी | कुछ इतिहासकारो के अनुसार इस सभ्यता का काल लगभग 2700 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व तक का माना जाता है |
आई आई टी खड़गपुर और भारतीय पुरातत्व विभाग के वैज्ञानिकों ने सिंधु घाटी सभ्यता की प्राचीनता को लेकर नए तथ्य सामने रखी हैं |  वैज्ञानिकों के मुताबिक यह सभ्यता 5500 नहीं बल्कि 8000 साल पुरानी थी | शोधकर्ता ने इसके अलावा हड़प्पा सभ्यता से 1,0000  वर्ष पूर्व की सभ्यता के प्रमाण भी खोज निकले हैं | इसका मतलब यह है कि सभ्यता तब विद्यमान थी जबकि भगवान श्रीराम ( 5114 ईसा पूर्व ) का काल था और श्री कृष्ण के काल (3228 ईसा  पूर्व ) में इसका पतन होना शुरू हो गया था | जो भी हो लेकिन यह तो तय था की सिंधु घाटी सभ्यता महाभारत काल में भी मौजूद थी | महाभारत में इस जगह  सिंधु देश कहते थे |  इस सिंधु देश का राजा जयद्रथ था | जयद्रथ का विवाह धृतराष्ट्र की पुत्री दुःशाला के साथ हुआ था | महाभारत के युद्ध में जयद्रथ ने कौरवो का साथ दिया था और चक्रव्यूह के दौरान अभिमन्यु की मौत में उसकी बड़ी भूमिका थी | एक नए अध्ययन में दवा किया  गया है कि करीब चार हजार साल पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता के पतन के पीछे का मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन हो सकता है | इस नए अध्ययन में हिन्दू मान्यता की पवित्र नदी सरस्वती के स्रोत और अस्तित्व को लेकर लम्बे समय से जारी बहस को सुलझाने का भी दावा किया गया है | इस अध्ययन में पुरातत्व विभाग और अत्याधुनिक भू - विज्ञान तकनिको से जुड़े नए आंकड़े भी पेश किये गए हैं | इसमें कहा गया है कि  मानसून बारिश में आई कमी नदी के प्रवाह को कमजोर करने का कारण बानी , जिसने हड़प्पा संस्कृति के विकाश और पतन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई | हड़प्पा संस्कृति अपने कृषि कार्यो के लिए पूरी तरह से नदी के प्रवाह पर निर्भर थी | 
'प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज ' पत्रिका में छिपे निष्कर्षो में अंतरास्ट्रीय दल ने उपग्रह से हासिल तस्वीरों और स्थलाकृतिक आंकड़ों का उपयोग किया और सिंधु तथा उसके आसपास बहने वाली नदियों के प्रभाव क्षेत्र के डिजिटल मानचित्रो का विश्लेषण किया | समय के साथ भू-भाग में आए बदलाव का पता लगाने के लिए तलछट के मूल स्रोतों का पता लगाने के लिए नमूने एकत्रित किये गए | इन नमूनों से यह भी पता लगाने की कोशिस की गई कि तलछट में नदियों या हवा के कारण समय के साथ क्या-क्या परिवर्तन आए |

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