Skip to main content

ALBERT EINSTEIN का दिमाग क्यों था खास ?

ALBERT EINSTEIN का दिमाग क्यों था  खास ? 

जिस इंसान ने आजतक कोई गलती नहीं की है तो यह मान लेना चाहिए कि  उस इंसान
ने अपनी लाइफ में कुछ नया करने कि कोशिस ही नहीं की होगी | ऐसा ही कुछ मानते थे
दुनिया के सबसे महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन | इनका जन्म 14 मार्च 1889 को जर्मनी
ALBERT EINSTEIN का दिमाग क्यों था  खास ?
के उल्म शहर में एक  यहूदी परिवार में हुआ था  | उनके पैदा होने के बाद डॉक्टर्स ने नोटिस किया कि उनका सर नार्मल बच्चो के मुक़ाबले काफी बड़ा था, और वो एक एब्नार्मल बच्चे के
रूप में जन्मे थे | इसके बावजूद भी उनका दिमाग इतना तेज़ था की आजतक कोई भी उनका मुक़ाबला नहीं कर पाया | आज 60 साल हो गए आइंस्टीन हमे छोड़कर चले गए , लेकिन आज भी साइंस उनकी थेसुस के बिना कमजोर है | तो यही वजह है कि हर कोई उनके दिमाग के बारे में जानना चाहता है,कि आखिर उनके दिमाग में ऐसा क्या था जो की उन्हें इस मुकाम तक ले आया
आज उन्हें दुनिया भर में महान वैज्ञानिक के रूप में जाना जाता है |

क्या उनके ब्रेन में कोई सुपरनैचुरल पावर थी ? आइये जानने की कोशिस करते है :-

दरअसल जब एल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म हुआ था तब उनका सर किस भी नार्मल  बचे से ज्यादा
बड़ा था | नार्मल बच्चे  एक या दो साल की उम्र में बात करना सीख जाते हैं | लेकिन आइंस्टीन चार साल की उम्र तक बिलकुल बात नहीं कर पाते थे | मगर  दिन जब वो अपने माता-पिता के साथ रात के  खाने पर बैठे थे तभी अचानक से आइंस्टीन ने कहा सूप बहोत ही गर्म है | अपने अपने
बेटे को इस तरह एकदम से साफ़ बोलता सुन उनके माता-पिता हैरान हो गए और खुस भी हुए |
बाद में जब उनसे पूछा गया कि अबतक तुम क्यों कुछ नहीं  बोलते थे तो आइंस्टीन  ने अज़ीब सा
जवाब दिया कि अबतक तो सबकुछ सही था |

आइंस्टीन के जीवन से जुड़े अजीबो गरीब किस्से यही नहीं रुके बल्कि उनके बड़े होने पर भी
उनकी कई ऐसी आदतें थी जिनके बारे में सुनकर कोई भी हैरान हो जाता है || जैसे की आइंस्टीन
को डेट्स और फ़ोन नंबर याद रखने में दिक्कत होती थी, यहाँ तक की उन्हें खुद का टेलीफ़ोन
नंबर याद नहीं रहता था | एक बार उनके एक सहकर्मी ने उनका फ़ोन नंबर माँगा तो आइंस्टीन
उनके पास रखी टेलीफोन डायरेक्टरी में अपना फ़ोन नंबर ढूंढ़ने लगे | यह देखकर उनके सहकर्मी
ने हैरान होकर बोला कि आप अपना फ़ोन नंबर क्यों नहीं याद रखते ? तो आइंस्टीन ने उनको
कहा किसी ऐसी चीज़ को भला क्यों मैं याद रखु जो मुझे किताबों में ढूंढ़ने से मिल जाती है | आइंस्टीन
कभी भी जूतों के अंदर मोज़े नही पहनते थे क्युकि उनके टांगो कि उंगलिया इतनी बड़ी थी कि
बचपन में उंगलियों की वजह से मोज़े में छेद हो जाते थे | इसलिए उन्होंने मोजा पहनना ही छोड़ दिया |

यहां तक कि वो अपने जूतों के फीतों को भी दुसरो से बंधवाते थे | क्युकि उन्हें जूतों के फीतों को भी
बांधना नहीं आता था | आइंस्टीन हमेसा कहते थे कि मेरे अंदर कोई खास चीज़ नहीं है पर मैं तो केवल
ऐसा इंसान हु जिसमे क्यूरिओसिटी कुट - कुट कर भरी हुई है |  लेकिन आप को यह जानकर हैरानी
होगी कि आइंस्टीन हमेसा से इतने बुद्धिमान नही थे बल्कि वो बचपन में पढ़ाई में बहुत कमजोर थे |
इसलिए बचपन में उनकी गिनती बेवकूफ बच्चों में की जाती थी | उनकी कुछ हरकतों की वजह से
कुछ लोग उन्हें शारीरिक रूप से भी विकलांग कहना शुरू कर दिया था | ख़ासकर आइंस्टीन के
टीचर भी उन्हें पसंद नहीं करते थे | क्युकी वो सिर्फ साइंस और मैथ्स के अलावा हर विषय में फेल
होते थे | बचपन से ही आइंस्टीन को किताबों में कोई रूचि नहीं थी | हालाँकि इसके बावजूद भी
दुनिया के सामने साइंस की कई ऐसी थेसुस पेश कि जिसके बिना आज का साइंस कमजोर है |

और यही वजह है कि उनका दिमाग़ आज भी चर्चा का विषय बना हुआ है | 18 अप्रैल 1955 आइंस्टीन
की मृत्यु के बाद पैथोलॉजिस्ट डॉ थॉमस हार्वे ने आइंस्टीन के परिवार के अनुमति के बिना ही उनके
दिमाग़ को रिसर्च के लिए निकाल लिया था और वो वहा से भाग गए | इस हरक़त की वजह से डॉ हार्वे
को नौकरी से निकाल दिया गया | पूछने पर उन्होंने कहा की ऐसा सिर्फ रिसर्च के लिए किया है | और
वो वादा करते है कि  वो आइंस्टीन के दिमाग पर जरूर रिसर्च करेंगे | ताकि आने वाले समय में इससे
साइंस और साइंटिस्ट दोनों को फायदा हो सके | लेकिन रिसर्च के लिए परमिशन न मिलने के कारण
हार्वे ने आइंस्टीन के दिमाग को एक जार के अंदर बेसमेंट में कैद रखा | बाद में आइंस्टीन के बेटे
हेंस एल्बर्ट आइंस्टीन के अनुमति के बाद डॉ हार्वे ने आइंस्टीन के दिमाग पर रिसर्च करना शुरू किया |

पहले उन्होंने आइंस्टीन के दिमाग का वज़न किया जिसका वजन 1230gm था जो नार्मल इंसान के
दिमाग़  के मुक़ाबले काफी छोटा था | क्युकि एकनार्मल  इंसान के दिमाग का वजन करीब 1400gm
होता है |  इसके बाद डॉक्टर हार्वे ने आइंस्टीन के ब्रेन को 240 भागों में टुकड़े किये और उन टूड़को
को दुनिया भर के मशहूर रेसर्चेर्स के पास भेज दिया | ताकि वो अच्छे से देख सके कि आखिर
आइंस्टीन के दिमाग़ में ऐसा क्या था जो बाकि आम इंसानो में नहीं था | और उसके बाद डॉ हार्वे ने
आइंस्टीन केब्रेन टिस्सुस की हजार माइक्रोस्कोपिक स्लाइड्स बनाए  ताकि उनके दिमाग़ कि अच्छे
तरीके से जाँच हो पाए | रिसर्च के दौरान ये पाया गया कि आइंस्टीन के ब्रेन में आम इंसानों से ज्यादा सेल्स थी |
आइंस्टीन के दिमाग़ का सेरिब्रल कोर्टेक्स नाम का हिस्सा एक आम आदमी के दिमाग के मुक़ाबले
काफी अलग था | दरअसल ये सेरिब्रल कोर्टेक्स दिमाग का एक जरुरी हिस्सा होता है |

जो सबसे जटिल दिमाग़ी प्रोसेस का सबसे अहम फैक्टर होता है | और यही ऐसा हिस्सा होता है जो
अजीबो गरीब तरीकों  से विकसित्त होता है | और सइंटिस्टों का मानना है कि यही कारण है कि
उनका दिमाग बहुत ही असाधारण सोचता था | जब सइंटिस्टों  ने आइंस्टीन के ब्रेन की जाँच शुरू की
तो वो बिलकुल हैरान रह गए कि उनके ब्रेन में  wrinkle parietal operculum मिसिंग है | यही कारण है कि उनके ब्रेन का साइज नार्मल साइज से ज्यादा बड़ा था | सइंटिस्टों  का कहना है कि यही वजह है कि उनकी मैथमेटिकल स्किल और चीज़ों को इमेजिन करने कि शक्ति नार्मल इंसान से कही ज्यादा थी | उनके ब्रेन में न्यूरॉन्स की डेंसिटी 17 % ज्यादा थी | जिस वजह से आइंस्टीन को ज्यादा ब्रेन पार्ट मिलती थी | यही वजह थी कि आइंस्टीन का कंसंट्रेशन और दूरदर्शिता दुसरो से काफी ज्यादा थी | कहते है की आइंस्टीन के ब्रेन में ज्यादा फोल्ड्स थी | उनकी intelligency  का यह भी एक कारण था आइंस्टीन का दिमाग 40 टुकड़ो में अमेरिका के फिलाडेल्फिया शहर के मटर म्यूजियम में प्रेजेंट किया गया है |

Comments

Menu Footer Widget

HISTORY OF INDIA - ANCIENT INDIA | THE EARLY MAN

THE EARLY MANThe fossils of the early Human Being have been found in Africa about 2.6 millions years back,but there are no such evidence in India. So, it appears that India was inhabited later than Africa.The recent reported artefacts from BORI  in Maharashtra suggest that the appearence of human beings in India was around 1.4 million years ago.The evolution of the Easth's crust shows four stages . The fourth stage is divided into PLEISTOCENE( most recent ) andHOLECENE(present).Man is said to have appeared on the Earth in the early Pleistocene.They used tools of stone roughly dressed by crude clipping . This period is therefore, known as the STONE AGE, which has been divided into :THE PALAEOLITHIC OR OLD STONE AGETHE MESOLITHIC OR MIDDLE STONE AGETHE NEOLITHIC OR NEW STONE AGE
THE PALAEOLITHIC AGE ( 500000 BC - 9000 BC )



It seems that Palaeolithic men belonged to the Negrito race.HOMO SAPIENSfirst appeared towards the end of theis phase.Palaeolithic men were hunters and food gathere…

THE MAURYAN EMPIRE | ANCIENT INDIA

ORIGINS OF THE MAURYASMUDRARAKSHASA - Mauryas were conncected with the Nandas and were called them  Vrishal/Kulhina ( of low clan ).BUDDHIST TRADITION - Chandragupta was a Kshatriya ( Sakya clan ) . The region was full of peacocks (Mors), so became famous as 'moriyas'.PURANAS -They belonged to the Moriyan clan ( low caste ) .JUNIGARH ROCK INSCRIPTION OF RUDRADA - Man ( AD 150 ) suggests that Mauryans might have been of Vaishya origin.
BUDDHIST LITERATURE  Ashok vandana and Divyavandana Information about Bindusara and Ashoka's expenditons to Taxila.Diparvamsa and mahavamsa ( Shrilankan chronicles ) Ashoka's role in spreading Buddhism in Srilanka.JATAKAS Socio- economic conditions of Mauryan period.Sthaviravali Charita or Parisistha - parvan of Hemachandra ( A biography of Chanakya) . Chandragupta's conversion to Jainism.MUDRARAKSHASA OF VISHAKHADATTA in sanskrit, an account of prevailing socio- economic conditions and about how Chandragupta overthrew the Nandas with …